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ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन कम करने एवं जलवायु परिवर्तन के संबंध में आर आई एन एल-वी एस पी द्वारा किये जा रहे उपाय एवं प्रयास

ऊर्जा दक्षता ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली आई एस ओ : 50001 हरित गैस प्रबंधन
ऊर्जा दक्षता

आर आई एन एल का मानना है कि प्रभावी ऊर्जा प्रबंधन से ही संगठन की वित्तीय स्थिति में सुधार लाया जा सकता है एवं स्थायित्व को प्राप्त किया जा सकता है| अत: संगठन में शुरुआत से ही ऊर्जा प्रबंधन उपायों को अपनाया जाता रहा है| इस्पात उत्पादन लागत में ऊर्जा लागत का हिस्सा लगभग 40% है और आर आई एन एल अद्यतन प्रौद्योगिकी को अपनाने, क्षमता विकास एवं योजनाबद्ध तरीके से सुधार लाने जैसे बहु विध प्रयासों के माध्यम से ऊर्जा लागत को कम करने हेतु ध्यानकेंद्रित कर रहा है|

 

ऊर्जा दक्षता हासिल करने हेतु आर आई एन एल के प्रयास

ए)    अद्यतन स्वच्छ प्रौद्योगिकी को अपनाना

बी)    प्रक्रिया प्रबंधन के माध्यम से ऊर्जा खपत में निरंतर सुधार

सी)    ऊर्जा दक्ष उपस्करों की अधिप्राप्ति

डी)    ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली का कार्यान्वयन

 

 

अद्यतन स्वच्छ प्रौद्योगिकी अपनाना

 

डिजाइन स्तर पर

 

  •   आर आई एन एल में कोक शुष्क शीतलन संयंत्र (4 संख्या) के माध्यम से तप्त कोक से व्यर्थ ऊष्मा ऊर्जा की पुन:प्राप्ति द्वारा विद्युत, प्रॉसेस स्टीम एवं शीतलित जल तैयार करना| आर आई एन एल में बैक प्रेशर टर्बाइन स्टेशन (2*7.5 मेगावाट) और कंडेंसिंग एक्स्ट्रैक्शन टर्बाइन (13 मेगावाट) स्थापित की गईं|

  •   धमन भट्ठी 1 व 2 में टॉप प्रेशर रिकवरी टर्बाइन (प्रत्येक की 12 मेगावाट क्षमता) द्वारा धमन भट्ठी गैस की व्यर्थ दाब ऊर्जा से विद्युत उत्पादन|

  •   इस्पात गलन शाला-1 व 2 में एल डी गैस पुन:प्राप्ति प्रणाली द्वारा कन्वर्टर ब्लोइंग से एल डी गैस को पुन: प्राप्त कर उसका पुनर्तापन भट्ठियों में ईंधन के रूप में उपयोग|

  •   वाष्पीकृत शीतलन प्रणाली के माध्यम से रीहीटिंग फर्नेस स्किड व पोस्ट के शीतलन से प्रॉसेस स्टीम तैयार करना|

  •   कैल्सिनेशन प्लांट किल्न के प्रीहीटर एवं रोलिंग मिल्स के गैस व एयर रीकूपरेटर से कंबस्चन प्रणाली द्वारा व्यर्थ ऊष्मा पुन: प्राप्ति|

 

इन उपायों से प्रतिवर्ष ऊर्जा खपत में 196254 टन तेल के बराबर (टी ओ ई) और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 12.1 लाख टन तक कमी आती है|

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मौजूदा इकाइयों का विस्तारण व आधुनिकीकरण

 

  •   सिंटर कूलर व्यर्थ ऊष्मा पुन: प्राप्ति से संबंधित नीडो परियोजना के अंतर्गत तप्त सिंटर की ऊष्मा ऊर्जा के उपयोग से 20.6 मेगावाट विद्युत उत्पादन| भारत और जापान के बीच अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के अंतर्गत यह परियोजना ली गई है|

  •   धमन भट्ठी-3 के स्टोव्स से व्यर्थ ऊष्मा पुन: प्राप्ति प्रणाली के अंतर्गत व्यर्थ ऊष्मा पुन: प्राप्ति|

  •   सिंटर संयंत्र-2 में ऊर्जा दक्ष बर्नर और व्यर्थ ऊष्मा पुन: प्राप्ति प्रणाली|

  •   धमन भट्ठियों में कोक के बदले चूर्णित कोयला प्रेषण|

  •   इस्पात गलन शाला-2 में बिलेट कास्टर|

  •   ऊर्जा दक्ष वर्टिकल शॉफ्ट किल्न|

  •   ऊर्जा दक्ष वायु पृथक्कीकरण संयंत्र|

  •   धमन भट्ठी गैस की अधिशेष मात्रा के उपयोग से विद्युत उत्पादन हेतु 120 मेगावाट धमन भट्ठी गैस आधारित निजी विद्युत संयंत्र|

  •   उत्पादकता में वृद्धि हेतु धमन भट्ठी-1 का ऊर्जा दक्ष विशेषताओं से पुनर्निर्माण/

  •   उत्पादकता में वृद्धि हेतु धमन भट्ठी-2 का ऊर्जा दक्ष विशेषताओं से पुनर्निर्माण

  •   ऊर्जा दक्ष विशेषताओं (ऊर्जा दक्ष बर्नर, वेरिबुल फ्रीक्वेंसी ड्राइव) की परिकल्पना के साथ सिंटर संयंत्र 1 व 2 की क्षमता का आवर्धन|

 

इन परियोजनाओं की पूर्ति से विशिष्ट ऊर्जा खपत में लगभग 5 लाख टन (टनों में तेल के बराबर) तक कमी आएगी|

 

 

अपशिष्ट ऊर्जा से विद्युत उत्पादन

 

 आर आई एन एल में अपशिष्ट ऊर्जा की पुन:प्राप्ति से विद्युत उत्पादन हेतु अपशिष्ट ऊर्जा पुन: प्राप्ति प्रौद्योगिकी लगाई गई| वर्तमान में आर आई एन एल, अपशिष्ट ऊर्जा के उपयोग के माध्यम से लगभग 56% विद्युत आवश्यकता की पूर्ति कर रहा है| आर आई एन एल, 3 मिलियन टन से 6.3 मिलियन टन प्रतिवर्ष विस्तारण के दौरान उत्सर्जित व्यर्थ गैसों के उपयोग हेतु पूर्णत: तैयार है| इस प्रकार अपशिष्ट ऊर्जा के माध्यम से 62% विद्युत उत्पादन किया जाता है, जो भारतीय इस्पात उद्योग में सर्वोच्च है|

 

 

 

प्रॉसेस मैनेजमेंट के माध्यम से ऊर्जा खपत में सतत सुधार

 

आर आई एन एल का मानना है कि प्रॉसेस मैनेजमेंट से सतत सुधार संभव है| आरंभिक स्तर से विभागीय ऊर्जा समूहों की भागीदारी एवं सुझाव योजना व गुणवत्ता चक्रों के कार्यान्वयन से आर आई एन एल ऊर्जा खपत में उल्लेखनीय कमी लाने में सफल हुआ है| प्रॉसेस मैनेजमेंट संबंधी कुछ गतिविधियाँ इस प्रकार हैं:

 

  • उप उत्पाद ईंधनों के उत्सर्जन एवं वितरण के सतत अनुश्रवण के कारण अधिशेष गैस की अधिक मात्रा से विद्युत उत्पादन किया जाने लगा, जिससे ईंधनों व युटिलिटीज के नुकसान से बचाया जा सका| इन प्रयासों से, अधिशेष उप उत्पाद गैस का उपयोग ताप विद्युत संयंत्र में किया जाने लगा और इस प्रकार वर्ष में 12 लाख टन बॉयलर कोयले की बचत हुई|

  • धमन भट्टियों में कच्चेमाल के उपयुक्त मिश्रण, AL2O3/SiO2 के अनुकूलतम अनुपात, ब्लॉस्ट ऑक्सीजन एनरिचमेंट से कोक की खपत में कमी हुई|

  • सिंटर संयंत्रों में डीप बेड सिंटरिंग से ताप ऊर्जा खपत का इष्टतमीकरण|

  • वॉयर रॉड मिल में हॉट चार्जिंग की शुरुआत और भट्ठियों में ऊष्मा-क्षय में कमी|

  • निजी विद्युत संयंत्र से अधिकतम विद्युत उत्पादन, अधिक आवश्यक अवधि के दौरान माँग, रोलिंग मिल्स के डी सी मोटर हेतु फील्ड करेंट में कमी, एम एम एस एम व बार मिल के स्ट्रैंड्स का एकीकरण, एम एम एस एम के फ्रीक्वेंसी कन्वर्टरों के उन्नयन के माध्यम से विद्युत ऊर्जा प्रबंधन|

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ऊर्जा दक्ष उपस्कर की अधिप्राप्ति

 

  • शीतलित जल संयंत्र 3 व 4 में मौजूदा चिल्लर की जगह ऊर्जा दक्ष चिल्लर की प्रतिस्थापना

  • सिंटर कूलर के फैन द्वारा लाइफ साइकिल कास्टिंग के माध्यम से व्यर्थ ऊष्मा पुन: प्राप्ति

  • स्टार रेटेड एयर कंडीशनर

  • ऊर्जा दक्ष मोटर

  • इलेक्ट्रिकल प्रणालियों में वेरिबुल फ्रीक्वेंसी ड्राइव की स्थापना

  • ऊर्जा दक्ष (टी 5) लैंप

  • ऊर्जा बचत प्रणाली के माध्यम से लाइटिंग की सुविधा और पढ़ें

 

हरित उत्पाद

 

  • Fe 500 (Fe 500 श्रेणी से 500 N/mm2 उच्च उत्पादन प्राप्ति के कारण इस्पात की खपत में 15% की कमी) जैसे हरित इस्पात का उत्पादन

 

अंतर्राष्ट्रीय सहयोग

 

ग्रीन एड योजना के तहत नीडो प्रौद्योगिकी सहयोग से आर आई एन एल के सिंटर संयंत्र-1 में सिंटर कूलर से 20.6 मेगावाट व्यर्थ ऊष्मा पुन: प्राप्ति परियोजना स्थापित की गई| यह भारतीय इस्पात उद्योग में सिंटर संयंत्रों से विद्युत उत्पादन से संबंधित ऐसी पहली परियोजना है| परियोजना का प्रवर्तन 31.07.2014 को किया गया और इससे संबंधित कार्यक्रम आयोजित किया गया| इस परियोजना के तहत जीवाश्म ईंधनों को नष्ट किये बगैर विद्युत उत्पादन किया जाता है और हरित गैस उत्सर्जन में कमी आती है|

 

आर आई एन एल, भारत व जापान के बीच द्विपक्षीय ऑफसेट क्रेडिट मैकानिज्म (बी ओ सी एम) के तहत वर्ष में आयोजित पब्लिक प्राइवेट पार्ट्नरशिप कोलेबरेटिव सम्मेलनों में भी भाग ले रहा है| जापान के प्रतिनिधियों ने 3 मार्च, 2015 को आर आई एन एल का दौरा किया और ऊर्जा संरक्षण एवं हरित गैस उत्सर्जन प्रबंधन हेतु आर आई एन एल के प्रयासों की प्रशंसा की|

 

स्वच्छ विकास तंत्र परियोजना

 

आर आई एन एल ने क्योटो प्रोटोकॉल मैकानिज्म के अनुरूप सी डी एम परियोजनाओं का कार्यान्वयन किया| विस्तारण व मौजूदा, दोनों इकाइयों में कार्बन क्रेडिट के दावे प्रस्तुत करने हेतु 15 स्वच्छ विकास तंत्र परियोजनाओं को पहचाना| वन व पर्यावरण मंत्रालय से 13 परियोजनाओं हेतु मेजबान देश का अनुमोदन प्राप्त हुआ| ये सी डी एम परियोजनाएँ संयंत्र के आंतरिक प्रयासों से पूरी की गईं| निम्नलिखित परियोजनाएँ यू एन एफ सी सी सी से पंजीकृत की गई हैं|

 

क्र.सं.

परियोजना शीर्षक

यू एन एफ सी सी सी पंजीकरण संख्या

अनुमानित सी ई आर

1

राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड की धमन भट्ठी-3 के गैस एक्स्पैंशन टर्बाइन की व्यर्थ दाब ऊर्जा से विद्युत उत्पादन

9613

60410

2

राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड की कोक ओवेन बैटरी #4 में कोक शीतलन प्रक्रिया से विद्युत उत्पादन

9988

68540

3

धमन भट्ठी-3 के स्टोव्स से व्यर्थ ऊष्मा पुन: प्राप्ति

10024

44932

 

अक्षय ऊर्जा
  • उक्कुहाउस एवं वी एस जी एच, दोनों जगह 1500 एल पी डी सोलर वाटर हीटिंग प्रणाली
  • पोलीकार्बोनेट शीट के माध्यम से प्राकृतिक रोशनी का उपयोग
  • संयंत्र में सौर ऊर्जा आधारित ट्रॉफिक सिग्नल लाइट
  • निगमित सामाजिक दायित्व के तहत पाडेरु जैसे बिजली से वंचित गाँवों में सोलार इनर्जी लैंप की आपूर्ति
  • एस ओ एस विलेज में सोलार इनर्जी सिटी
  • अक्षय ऊर्जा प्रमाणपत्र (आर ई सी) की अधिप्राप्ति के माध्यम से ग्रीन एट्रिब्यूट की अधिप्राप्ति

भावी परियोजना

  • 5 मेगावाट सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना की योजना
  • विभिन्न इमारतों (तकनीकी प्रशिक्षण संस्थान, विशाखा स्टील जनरल अस्पताल, नगर प्रशासन) में रूफ टॉप सोलार प्रणाली